जब भी चावल खाये तो चम्मच से नहीं हाथ से खायें( हा खाने से पहले दोनों हाथों को साफ करके धोये,) हाथों की सारी उंगलियों में पाँचों तत्व मौजूद होते हैं ।
जैसे अंगूठे में – अग्नि तत्व ।
तर्जनी उंगली में – वायु तत्व ।
मध्यमा उंगली में – आकाश तत्व । अनामिका उंगली में – पृथ्वी तत्व । और कनिष्का उंगली में – जल तत्व ।
उंगलियों के पांचों वर्ग से अलग अलग विद्युत धारा बहती है । इसलिए मुद्रा विज्ञान में जब उंगलियों का रोग अनुसार आपसी स्पर्श करते हैं । तब रुकी हुई या असंतुलित विद्युत बहकर शरीर की शक्ति को पुन: जगा देती है और हमारा शरीर निरोग होने लगता है ये अदभुत मुद्राएं करते ही यह अपना असर दिखाना शुरू कर देती हैं ।
