हिंदी दिवस : औपचारिकता निभाने का पर्व! :भारत का उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखण्ड तथा कुछ अन्य राज्य जहाँ के निवासियों की भाषा ही हिंदी है आज उपेक्षा के नजरिये से देखी जा रही है, तथाकथित जेन जी जिसकी सोच पर ही प्रश्न चिन्ह हो तथा उनके अविभावक आंग्लभाषा को उच्च स्तर की तथा पढ़े लिखे होने या आभिजात्य वर्ग का प्रतिनिधित्व करने की मानसिकता रखते हों वहाँ हिंदी भाषा के वर्तमान तथा भविष्य की दशा को आसानी से देखा जा सकता है। यह सत्य है कि भारत एक विशाल भूभाग वाले डेढ़ अरब आबादी का देश है जहाँ तमिल, कन्नड़, पंजाबी, तेलगू जैसे राज्यों की अलग भाषायें है लेकिन अगर हिंदी की आज सबसे अधिक उपेक्षा हो रही है तो वह हिंदी भाषा बोलने वाले राज्यों में है। आधुनिक शिक्षा और अंग्रेज़ी को पढे़ लिखे और सम्पन्न लोगों की भाषा होने की मानसिकता मानसिक गुलामी से अधिक कुछ अधिक नही है, भारतेंदु हरिश्चंद्र ने लिखा था ‘ निज भाषा उन्नति अहे सब उन्नति को मूल. बिनु निज भाषा ज्ञान के मिटे ना हिय को शूल। हम अंग्रेजी भाषा सहित किसी भी भाषा का विरोध नही कर रहे हैं लेकिन जिन राज्यों की मातृभाषा हिंदी है वहीं हिंदी की उपेक्षा तथा दुर्दशा कहीं ना कहीं दुखद है। हिंदी हमारे पूर्वजों की भाषा है, हमारी पहचान है हमारा गर्व है यहाँ में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व: अटल बिहारी वाजपेयी के एक वक्तव्य को स्मरण कर रहा हूँ वाजपेयी जी ने कहा था कि माँ जैसा स्नेह और दुलार हमें हिंदी प्रदान करती है और हिंदी को मां समान सम्मान देना हम सब हिंदी भाषी लोगों का दाइत्व और कर्तव्य है।(अजय तिवाड़ी)
*हिंदी दिवस : औपचारिकता निभाने का पर्व*हिंदी भाषी राज्यो में ही उपेक्षित है हिंदी* *अजय तिवाड़ी “
Date:
Share post:
