वर्दी उतरी है, जज्बा नहीं 🩸🇮🇳
कलयुग में रक्तदान ही महादान है
सुनो साथियों,
पहले देश की सीमाओं की रक्षा की है, अब रक्तवीर बनकर समाज की रक्षा का प्रण लिया है।
आज अमर उजाला फाउंडेशन के "स्वैच्छिक रक्तदान" शिविर में बेस हॉस्पिटल कोटद्वार में रक्तदान किया। ये कोई एहसान नहीं, ये कर्ज है उस मिट्टी का जिसने हमें फौजी बनाया है।
एक फौजी का फर्ज सरहद पर खत्म नहीं होता। वर्दी में दुश्मन से लड़े, अब बिना वर्दी के समाज में बीमार नागरिकों को रक्तदान कर बचाएंगे।
फौजी रिटायर होता है, फौजी का फर्ज नहीं। 1 यूनिट रक्त = 4 जिंदगी = 4 परिवारों की मुस्कान– मैंने तो अपना कर्तव्य निभा दिया। अब आपकी बारी है।
*युवाओं से सीधा सवाल* – जब 20 साल का फौजी सरहद पर ड्यूटी से पीछे नहीं हटता, तो तुम 18 साल के जवान एक सुई से क्यों डरते हो?
डर के आगे जीत है, और सुई के आगे जिंदगी है।
*पूर्व सैनिक भाइयों से आह्वान* – आओ, फिर से एक यूनिट बनाते हैं। रक्तवीरों की यूनिट। दिखा दो दुनिया को कि फौजी सिर्फ रक्षा करना नहीं, जीवन देना भी जानता है। हर कैंट, हर गाँव में ब्लड डोनेशन कैंप लगवाओ।
*नेताओं सुन लो*– मंच से भाषण मत दो, अस्पताल चलो। नेतृत्व का मतलब आगे चलकर बाजू दिखाना होता है। मैंने दिखा दी, अब तुम दिखाओ।
*कसम है मुझे उस तिरंगे की,* – जब तक ये साँसें चलेंगी, जब तक ये खून रगों में रहेगा, हर 90 दिन में रक्तदान करके किसी का जीवन बचाता रहूँगा।
पुनः अनसूया प्रसाद सेमवाल जी और अमर उजाला परिवार का आभार। आपकी प्रेरणा से आज एक नेक काम किया है।🙏
जय हिंद,
महेंद्र
पूर्व सैनिक
