बंगाल, आसाम और तमिलनाडु में कांग्रेस का सूपड़ा साफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रीय स्वीकार्यता बढी़:

आसाम से लेकर बंगाल की जीत ने भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता इन चुनाव ने बहुत बढ़ा दिया है वहीं ममता बनर्जी की बंगाल चुनाव जीत कर अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को बंगाल सौंपकर स्वयं राष्ट्रीय राजनीति में मोदी विरोधी समूह की नेता बनने की उम्मीद इन चुनाव परिणामों ने बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दी है

। वहीं अगर बात करें कांग्रेस की तो केरलम के चुनाव परिणाम को छोड़कर कांग्रेस का शेष सभी राज्यों में सूपड़ा साफ हो गया है । अगर इन चुनाव परिणामों की राष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा करें तो सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रियता मे बहुत अधिक बढ़ गई है तथा भारतीय जनता पार्टी की बंगाल जीत के बाद राष्ट्रीय स्वीकार्यता बढ़ गई है, वहीं कांग्रेस से दूरी बनाये रखने वाले विपक्षी दलों को आशा थी कि अगर त्रिणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी यह चुनाव जीत जाती हैं तो विपक्षी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर देते लेकिन बंगाल के इन विधानसभा चुनावों ने ममता बनर्जी की राजनीति पर पूर्णविराम लगा दिया है। अगर कांग्रेस की बात करें तो केरलम में थोड़ी इज्जत जरूर बची है लेकिन बंगाल, आसाम और पदुचेरी, तमिलनाडु में कांग्रेस का प्रदर्शन निराशा जनक रहा है, इन राज्यों के चुनाव परिणामों ने कांग्रेस में राहुल गाँधी की स्वीकार्यता और विश्वसनीयता पर बहुत ही बड़ा डेंट पड़ गया

है जिससे उबरने में शायद कांग्रेस को बर्षों लग जायें तथा कांग्रेस को राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा का विकल्प तलाशने की आवश्यकता आन पड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेहनत रंग लाई: लगभग पिचहत्तर साल की अवस्था में बंगाल में बीस से अधिक चुनावी सभाओं को सम्बोधित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहुत मेहनत की जिसका सुखद परिणाम आज बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की एकतरफा जीत है।

वहीं बात करे राहुल गाँधी की कांग्रेस पार्टी के लिए किया गया कार्य आज चुनाव परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। अजय तिवाड़ी।।।।

