*गायत्री तीर्थ शांतिकुंज की अधिष्ठात्री रही परम् वंदनीया माता भगवती देवी के जन्म शताब्दी समारोह के निमित्त विदेश सहित पूरे भारतवर्ष में ज्योति कलश रथ यात्रा कार्यक्रम का आयोजन* *अलग खबर कोटद्वार की बात*

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मानव जाति में देवत्व का उदय, धरती पर स्वर्ग का अवतरण, व्यक्तिगत विकास, परिवारिक विकास और सामाजिक उत्थान, स्वस्थ शरीर, स्वच्छ मन और सभ्य समाज, आत्मवत सर्वभूतेषु, वसुधैव कुटुम्बकम आदि उद्देश्यों को लेकर समाज में व्याप्त अंधविश्वास, कुरीति व दुर्व्यसनों से मुक्ति पाने, अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में परम् पूज्य गुरुदेव पंडित श्री राम शर्मा आचार्य द्वारा वसन्त पंचमी 1926 से प्रज्वलित अखण्ड ज्योति के सौ वर्ष पूरे होने एवं गायत्री तीर्थ शांतिकुंज की अधिष्ठात्री रही परम् वंदनीया माता भगवती देवी के जन्म शताब्दी समारोह के निमित्त विदेश सहित पूरे भारतवर्ष में ज्योति कलश रथ यात्रा कार्यक्रम चल रहा है। अपने उत्तराखंड में भी शांतिकुंज हरिद्वार से शुभारंभ यात्रा हरिद्वार, उधमसिंह नगर, कुमांऊँ क्षेत्र के जनपदों से होती हुई 9 अप्रैल से जनपद पौड़ी में प्रवेश करेगी। यह यात्रा पौड़ी में प्रवेश करते हुए शंकरपुर से धुमाकोट, नैनीडांडा, जड़ाऊखांद -गौलिखाल, रसिया महादेव, मैठाणा घाट, बीरोंखाल, स्यूँसी, चौखाल, चौथान, चोपड़ाकोट, बैजरो, गढ़कोट, वेदीखाल, सैंधार, पोखड़ा, एकेश्वर, सन्तूधार, पाटीसैण, सतपुली ज्वाल्पाधाम, पोखरीखेत, सीकू, पौड़ी, श्रीनगर तक चलेग

। इसके उपरांत 22 अप्रैल से रुद्रपयाग जनपद में प्रवेश करेगी। मुख्य मार्ग के निकट ग्रामवासी ज्योति कलश यात्रा का स्वागत-पूजन नमन-वंदन आरती के माध्यम से करेंगे। यह जानकारी पौड़ी जनपद के गायत्री परिवार शाखा के समन्वयक श्री वसन्त रावत जी ‘लबली भाई’ ने दी। एक पक्ष तक यह यात्रा पौड़ी जनपद में रहेगी। निश्चित रूप से यह यात्रा जनमानस की सनातन संस्कृति जीवन मूल्यों व सत्कर्मों के प्रति आस्था जगाने का कार्य करेगी, पंडित श्री राम शर्मा आचार्य ने कहा है कि गायत्री मंत्र व यज्ञ के माध्यम से ही आस्था संकट मिटेगा। शांतिकुंज गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्री राम शर्मा आचार्य द्वारा लिखित विपुल साहित्य का भी लोग लाभ उठा सकेंगे। ज्योति कलश की यह यात्रा उत्तराखंड के समस्त जिलों से होती हुई देहरादून में सम्पन्न होगी। सभी लोगों से अनुरोध किया जा रहा है कि यात्रा मार्ग पर सम्मलित होकर ज्योति कलश का स्वागत कर सनातन संस्कृति को पहचाने व इसको समृद्ध बनाने में अपना योगदान दें।

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