ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों और अमेरिका की संभावित दखलअंदाजी के संकेतों के बीच दोनों देशों के रिश्तों में भारी तनाव देखने को मिल रहा है। हालात इतने गंभीर होते जा रहे हैं कि अब युद्ध की आशंका भी जताई जा रही है। तेहरान की सख्त चेतावनी के बाद कतर में स्थित अमेरिकी अल-उदीद एयरबेस से कुछ कर्मियों को हटाया जा रहा है।

ईरान सरकार का आरोप है कि अमेरिका आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है, जिससे हालात और बिगड़ रहे हैं। इसी बीच ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को आगाह किया है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई का करारा जवाब दिया जाएगा। इसके बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हलचल तेज हो गई है।
अमेरिकी ठिकानों पर हमले की चेतावनी
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि यदि अमेरिका ने प्रदर्शनों के समर्थन में कोई सैन्य कदम उठाया, तो मध्य-पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। ईरान का कहना है कि सऊदी अरब, यूएई, कतर और तुर्की में स्थित अमेरिकी बेस भी संभावित खतरे के दायरे में होंगे।
अल-उदीद एयरबेस से आंशिक निकासी
तीन राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, कतर के अल-उदीद एयरबेस पर तैनात कुछ सैन्य और असैन्य कर्मियों को सतर्कता के तौर पर लौटने की सलाह दी गई है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह पूर्ण निकासी नहीं बल्कि सुरक्षा स्तर में बदलाव (पोश्चर चेंज) है। फिलहाल बड़े पैमाने पर सैनिकों को हटाने के संकेत नहीं मिले हैं।
ट्रंप की कड़ी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ईरान में प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार जारी रहे या फांसी जैसी कार्रवाइयां हुईं, तो अमेरिका कठोर कदम उठाएगा। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा,
“अगर लोगों को फांसी दी गई, तो ईरान को ऐसा जवाब मिलेगा जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी।”
उन्होंने ईरानी जनता से विरोध जारी रखने की अपील भी की और कहा कि “मदद आने वाली है।”
प्रदर्शनों में भारी जान-माल का नुकसान
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, हालिया विरोध प्रदर्शनों में अब तक लगभग 2600 लोगों की मौत हो चुकी है। यह प्रदर्शन पिछले कई वर्षों में ईरान की सत्ता के खिलाफ सबसे बड़े आंदोलन माने जा रहे हैं।
हस्तक्षेप का संकेत, बातचीत रुकी
एक इजरायली अधिकारी के हवाले से यह भी दावा किया गया है कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान में हस्तक्षेप का मन बना लिया है, हालांकि इसकी समय-सीमा और स्वरूप अभी स्पष्ट नहीं है। उधर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची और अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ के बीच चल रही बातचीत फिलहाल रोक दी गई है, जिससे तनाव और बढ़ गया है।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सुरक्षा कैबिनेट को भी स्थिति की गंभीरता को लेकर सतर्क कर दिया गया है। गौरतलब है कि पिछले साल ईरान और इजरायल के बीच 12 दिनों तक चले संघर्ष में अमेरिका की भूमिका भी सामने आई थी।



