चीन ने दी नए साल में भारत को धमकी चीन के राष्ट्रपति का बयान, क्या चिंता पैदा करता है? विस्तारवाद की नीति पर चल रहा पीपुल्स रिपब्लिक आॉफ चाइना के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का अपने मदरलैण्ड के विस्तारीकरण वाले बयान को भारत के सुरक्षा मामलों के जानकर भारत के पूर्वोत्तर के राज्य अरुणांचल प्रदेश को लेकर दिया गया बयान मान रहे हैं, वर्तमान में चीन का ताइवान, जापान, आस्ट्रेलिया, अमेरिका से लेकर भारत तक के साथ सीमा विवाद है, तथा भारत के साथ युद्ध और गलवान झड़प के बाद आपसी विश्वास लगभग समाप्त है, यद्यपि अमेरिका द्वारा हाल ही मे भारत पर रूस से तेल खरीद के विरोध में लगाये गये 50℅ टैरिफ के बाद भारत और चीन के बीच व्यापारिक रिश्ते थोडे़ सहज हुए हैं लेकिन सीमा विवाद और अविश्वास की भावना वर्षों से जारी है।

अभी वर्तमान में चीन का ताइवान के साथ विवाद लगातार बढ़ा है तथा इसका असर चीन जापान तथा चीन अमेरिकी सम्बंधों पर भी पडा़ है तथा वर्तमान विश्व परिदृश्य में हालात कभी भी विध्वंस युद्ध का रूप ले सकतें हैं। वहीं भारतीय रक्षा विशेषज्ञ नव वर्ष के उपलक्ष्य में चीन के राष्ट्रपति शी जिन पिंग के ताजा बयान को भारत के प्रदेश अरुणाचंल के संदर्भ में दिया गया मान रहे हैं, अपने बयान में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि चीन अपने राष्ट्रीय क्षेत्र के सैद्धांतिक विस्तार के कार्य को अनवरत जारी रखेगा तथा यह चीन की सार्वजनिक नीति का हिस्सा होगा।
चीन लम्बे समय से भारत के अभिन्न भाग अरुणाचल प्रदेश पर अपना एक तरफा स्वामित्व की बात करता है तथा गाहे बगाहे चीन के सैनिकों के कथित रूप से अरूणाचल प्रदेश में धुसने की खबरें भी आती रहती हैं भारत सरकार ने चीन के अरुणाचल प्रदेश को लेकर किए गये इकतरफा बयानों को सिरे से खारिज करते हुए बार बार कहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न भाग है और हमेशा रहेगा तथा इस विषय पर कोई देश मुगालते में ना रहे,
चीन का चरित्र विस्तार वाद तथा धोखे से हमला करने की रही है वर्तमान सरकार ने गलवान झड़प के बाद सीमा क्षेत्र में सड़कों, और टनलों के क्षेत्र में बेहद महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम उठाये हैं आज समय से भारत अपनी सेनाओं को सीमावर्ती क्षेत्रों में पंहुचा सकता है यद्यपि भारत एक शांति चाहने वाले देश के रूप में जाना जाता है लेकिन पडौसी पाकिस्तान तथा चीन के गठबंधन को लेकर हर समय सजगता तथा पूर्णतः तैयार रहने की आवश्यकता है क्योंकि दुश्मन की प्रवृत्ति जगजाहिर है सजगता और पूर्णतः तैयारी ही इनका विकल्प है रक्षा विशेषज्ञों की यही राय भी है। सम्पादक की कलम से।।अजय तिवाड़ी।।



