रिखणीखाल-
थवाडा-चैबाडा पंपिंग योजना के जल जीवन मिशन की धीमी गति पर लोग संशय में।
रिखणीखाल-नैनीडांडा के गाँवों में हर घर नल,हर घर जल पहुँचाने के लिए शुरू किये गए जल जीवन मिशन की धीमी गति और प्राकृतिक जल स्रोतों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।वर्ष 2019 से शुरू किये गए जल जीवन मिशन के तहत 5 साल यानी 2024 तक हर घर तक जल पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया था।
इसी क्रम में थवाडा-चैबाडा पंपिंग योजना का कार्य भी आरम्भ किया गया,लेकिन इस पंपिंग योजना से अभी तक जलापूर्ति की सम्भावना दूर दूर तक नजर नहीं आती।
वन पंचायत सरपंच द्वारी विनोद मैंदोला का कहना है कि कयी गांवों में अभी तक नल तक नहीं बिछाये गये हैं। ग्राम नावेतल्ली में कुछ हद तक घरों तक नल तो बिछाये गये हैं, लेकिन उन पर जलापूर्ति कब तक होगी।ये कहना अभी जल्दबाजी होगी।नलों के लीकेज का भी निरीक्षण नहीं हुआ। जो गांवों में जल संरक्षण के लिए टैंक बने हैं, वे बिना पानी के फट गये हैं, लीकेज की सम्भावना है।
गांवों में जो प्राकृतिक जल स्त्रोत है, वे भी मरम्मत, रखरखाव सड़क निर्माण कार्य का मलवा आदि से सूख गये हैं या कुछ आख्रिरी सांस ले रहे हैं। जल स्रोतों का लम्बे समय तक जीवित रखना व टिकाऊ होना भी जरूरी है।जल निगम प्रशासन को ठोस प्रयास करना चाहिए। जल संरक्षण की नवीनतम पद्धति का उपयोग किया जाना चाहिए। इसी प्रकार ग्राम द्वारी आदि गांवों में भी घरों तक नल व पाइपलाइन नहीं बिछायी गयी है।इस गाँव में पेयजल की भारी किल्लत है।गर्मियों में पानी की सप्लाई टैंकरों से की जाती है।
अब गर्मियों का सीजन आने ही वाला है।गाँवों में प्राकृतिक जल स्रोत सूख गये हैं। इस पंपिंग योजना का चालू होने का भी संशय बना है कि कब तक चालू होगा या नहीं होगा।
ग्रामीणों की मांग है कि इस पंपिंग योजना का कार्य शीघ्र पूर्ण करके अविलम्ब पेयजल आपूर्ति करायी जाये।