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मानवता को समर्पित व्यक्तित्व सुंदर सिंह चौहान

परहित सरिस धर्म नहि भाई: मानवता को समर्पित व्यक्तित्व सुंदर सिंह चौहान जी : *तमन्ना दर्दे दिल में हो तो कर खिदमत फकीरों की नहीं वो लोग मिलते हैं अमीरों के घरानों में।

आज सतपुली नगर के समाजसेवी तथा उद्यमी आदरणीय सुंदर सिंह चौहान जी का जन्म दिवस है, उत्तराखंड, तथा गढ़वाल तथा सतपुली क्षेत्र की जनता इन महामानव को जन्म दिवस पर शुभकामनाएं प्रेषित कर रही हैं।

ठाकुर सुंदर सिंह चौहान जी एक कर्मयोगी जिन्होंने अपने पुरुषार्थ से एक सफल उद्यमी का दर्जा प्राप्त किया, यद्यपि भारत भूमि पर हजारों लोगों ने अपने परिश्रम से जीवन में भौतिक धन सम्पदा अर्जित की लेकिन अपने परिवार अपने भाई भतीजों के लिए अपने कुटम्ब के लिए लेकिन मैंने अपने जीवन में इस कलिकाल में ठाकुर सुंदर सिंह चौहान जैंसा व्यक्तित्व देखा जो किसी असहाय ,दरिद्र को देखकर द्रवित हो जाता है दुखी हो जाता है बिना दिखावे के बिना प्रचार बस ईश्वर साक्षी उन गरीब, असहाय, जरूरमंदो, की मदद के लिए जो सम्भव मदद के लिए आगे आते हैं, कहा जाता है कि तीर्थ, चार धाम से श्रेष्ठ है किसी असहाय को उसकी आवश्यकता के अनुसार सहायता कर देना।।

परहित सरिस धर्म नहीं भाई

हमारे धर्म ग्रंथों में कहा गया है कि गरीब जरूरतमंद असहाय लोगों की सहायता से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। ऐंसी देनी देन जो कित सीखे हो सेन, ज्यों ज्यों कर ऊंचो करियो त्यों त्यों नीचे नयन अपने निज जीवन में बेहद सरल, ठाकुर सुंदर सिंह चौहान जी द्वारा स्थापित सतपुली नगर से महज चंद किलोमीटर की दूरी पर स्थित ठाकुर सुंदर सिंह चौहान वृद्ध आश्रम में असमर्थ असहाय बुजुर्ग जीवन के आखिरी पहर में आश्रय पा रहे हैं, घर औलाद ने जिन्हें त्याग दिया उनके लिए मलेठी में अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित ठाकुर सुंदर सिंह चौहान वृद्धाश्रम उनकी हिर्दय से निकली संवेदना का प्रमाण है कि आखिर यह व्यक्ति कितना दयालू होगा,

एक बार मैने ठाकुर सुंदर सिंह चौहान जी से उनके वृद्धाश्रम स्थापना के पीछे किस विचार को कारक पूछा तो चौहान जी ने कहा कि मै पहाड़ के गाँव गाँव घूमा पलायन के चलते गाँवों में बुजुर्गों की हालत देखी जीवन के आखिरी पहर में उनके असहाय शरीर के साथ जीवन संघर्ष ने मुझे बेचैन कर दिया शरीर साथ नही दे रहा और खाना पानी जुटाना है ऊपर से पहाड़ का पहाड़ जैसे कठिन जीवन उनकी दशा देख कर विचार आया कि मैं अपने पहाड़ में ही उनके लिए एक सम्मान का जीवन वो भी जीवन के आखिरी पहर में गुजारने की व्यवस्था कर सकूँ तो फिर नेक इरादों को ईश्वर भी फलीभूत करते हैं। और आज मलेठी सतपुली में उन असहाय बुजुर्गों की शानदार सम्मानजनक परस्थितियों में सेवा हो रही है।

आज के प्रचार प्रसार के युग में जहाँ लोग एक अदद पानी के गिलास पिलाने को मदद का रूप दिखा प्रिन्ट मीडिया, इलैक्ट्रॉनिक मीडिया, शोसल मीडिया पर खुद को प्रचारित करते नही अघाते वहीं ठाकुर सुंदर सिंह चौहान जी को मैंने देखा है बिना प्रचार बिना फोटो शूट चुप चाप मदद के हाथ बढाते यही वास्तविक दान है मदद का तरीका है जिसका साक्षी सिर्फ ईश्वर है। कर्मयोगी ठाकुर सुंदर सिंह चौहान जी को उनके जन्म दिवस पर हार्दिक बधाई मंगल कामनाएँ आप स्वस्थ रहें, नीरोग रहें दीर्घायु हों।। अजय तिवारी।।

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