कविता का शीर्षक – स्वतंत्रता पर्व |
देश सजा है दुल्हन सा,
स्वतंत्रता पर्व आया है |
पावन हो गया भारत मेरा,
घर घर तिरंगा लहराया है |
शहनाई का मौसम आया,
रंग खुशी का सब पर छाया |
हिंदू मुस्लिम सिख इसाई |
सबने तिरंगा फहराया |
पावन हो गया भारत मेरा |
स्वतंत्र पर्व आया है ||

पर मत भूलो उन बलिदानों को |
आज़ादी के दीवानो को |
कतरा कतरा खून बहाकर,
रणभूमि में शीश सजाकर,
देश को आजाद कराया है |
बारम्बार नमन उनको कर,
स्वतंत्रता पर्व आया है |
लाल किले के दुर्ग से देखो |
अपना तिरंगा लहराया है |
देश सजा है दुल्हन सा |
स्वतंत्रता पर्व आया है ||
भारत के हर सैनिक ने,
शौर्य अपना दिखाया है |
अन्नदाता ने खेत में जाकर,
खून पसीना बहाया है |
स्वतंत्रता के पावन पर्व पर |
भारत देश मुस्काया है |
गांव गांव और शहर शहर में |
घर घर तिरंगा लहराया है |
तीन रंगों के रंग से देखो |
सबने देश सजाया है |
जाति पाति से ऊंचे उठकर |
देश धर्म निभाया है |
भारत मां को सजा सजाकर |
भारत देश मुस्काया है |
पावन हो गया भारत मेरा |
स्वतंत्रता पर्व आया है |
आंखों में खुशियों के मोती |
मस्तक पर हिंदी की बिंदी |
जन गण मन के उद्धबोधन से |
मेरा देश मुस्काया है |
देश के बच्चे बच्चे ने,
तिरंगा लहराया है |
पावन हो गया भारत मेरा |
स्वतंत्रता पर्व आया है |
आज का भारत नवभारत है |
युवा समृद्ध और सशक्त है |
आगे का सपना है बुनना |
भारत को विकसित है करना |
इस आशा के साथ में ,
यह स्वतंत्रता पर्व आया है |
देश सजा है दुल्हन सा,
स्वतंत्रता पर्व आया है |
पावन हो गई धरती मेरी ,
स्वतंत्रता पर्व आया है |
स्वतंत्रता पर्व आया है |
भारत माता की जय 🇮🇳
© डॉ. अनुराग शर्मा,
असिस्टेंट प्रोफ़ेसर वाणिज्य,
राजकीय महाविद्यालय कण्वघाटी कोटद्वार, उत्तराखंड 246149.
9411038633, 8279997284
dranuragsharma.1@gmail.com



