देवभूमि में लिव-इन रिलेशन उत्तराखंड के मूलनिवाशियो के लिए एक अभिशाप ?
उत्तराखंड सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) में लिव-इन रिलेशन और स्थायी निवास जैसे कानूनों को लागू कर एक अघोषित विवाद पैदा कर दिया है। यह कानून देवभूमि की सनातनी संस्कृति उत्तराखंड सरकार का कोठाराघात है और विवाह के पवित्र बंधन की छवि को खराब करेगा।
लिव-इन रिलेशनशिप एक ऐसा संबंध है जिसमें दो वयस्क एक साथ बिना शादी के एक ही घर में एक साथ रहते हैं और एक-दूसरे के साथ भावनात्मक रूप से जुड़े रहते हैं। यह कानून देवभूमि पर बाहरी व्यक्तियों को बसाने का षड्यंत्र है, जिससे देह व्यापार जैसे कुकृत्यों को भी बढ़ावा मिलेगा।
इस कानून के अनुसार, एक साल के लिव-इन रिलेशनशिप के एक साल पूरा होने के बाद, व्यक्ति उत्तराखंड के स्थायी निवासी प्रमाण पत्र के हकदार हो जाएंगे, चाहे वे किसी भी बाहरी प्रदेश के क्यों न हों। यह कानून देवभूमि की मूल निवासियों के लिए एक अभिशाप से कम नहीं है। क्योंकि इनके माध्यमों से हमारी जमीनों और संसाधनों पर
देवभूमि को सरकार की तानाशाही से बचाने के लिए हम सभी को एकजुट होना होगा। पूर्व सैनिक संघर्ष समिति ने भी इस कानून के खिलाफ आवाज उठाई है। हमें इन कानूनों को खिलाफ आवाज बुलंद करनी होगी और देवभूमि की छवि को बचाना होगा।



